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बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान नाबार्ड द्वारा प्रायोजिक स्वायत्त संस्था
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विकास अध्ययन

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  3. विकास अध्ययन
क्र.सं.शीर्षक
1. कार्यपत्र संख्या 43
2. कर्नाटक में कम वर्षा वाले कठोर पत्थर के क्षेत्र में भूजल का अति दोहन।
3. AROBS में फण्ड प्रबन्धन-समस्याएं एवं विकल्प।
4. पंजाब में कुछ प्रमुख फसलों के लिए वित पोषण की मात्रा।
5. स्वयं सहायता समूहों का विकास एवं उत्तर जीविका-कुछ सैद्धान्तिक प्रस्ताव एवं अनुभव अन्य प्रमाण।
6. ग्रामीण महिलाओं के सषक्तीकरण हेतु समूह दृष्टिकोण-तमिलनाडु में कृषि विकास हेतु अर्न्तराष्ट्रीय कोष का अनुभव।
7. समूह की गतिशीलता एवं कार्य पद्धति पर सूक्ष्म अध्ययन।
8. पश्चिम बंगाल में सिंचाई नलकूपों के प्रबन्धन हस्तान्तरण पर अध्ययन।
9. स्वयं सहायता समूहों का बैंक द्वारा वित पोषण-कुछ समस्यायें।
10. क्रास रोड पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक।
11. डीएपी एवं डीसीसीबी की अनुश्रवण एवं समीक्षा प्रक्रिया- वर्तमान, समस्यायें एवं प्रस्तावित समाधान (स्टाक अनुपलब्ध)।
12. तीन प्रमुख बिन्दु वलसाइथान एवं बीजापुर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से सबक (स्टाक अनुपलब्ध)।
13. ग्रामीण बैकिंग संचालन की लाभ प्रदाता।
14. उत्तर प्रदेश में ग्रामीण वित्तीय संस्थान।
15. बैकिंग प्रशिक्षण के माध्यम के रूप में बैकिंग उन्मुख हिंदी का प्रयोग।
16. वित्तीय मध्यस्थ के रूप में स्वयं सहायता समूहों का अध्ययन।
17. दाता से मीडिया के माध्यम से बैंक।
18. स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन-सांगठनिक ढ़ाँचा।
19. विकासशील देशों के लिए स्वच्छ कृषि बाजार-भारत की स्थिति।
20. कृषि ऋण-भारत और ब्राजील का तुलनात्मक अध्ययन।
21. पंजाब में सहकारी बैंकों में कम अवधि के प्रशिक्षण की आवश्यकता ।
22. ग्रामीण ऋण पद्धति का विकास।
23. राज्य एवं जिला सहकारी बैंकों में निवेश प्रबन्धन एवं निवेश दक्षता।
24. 2000 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थिति।
25. सहकारी प्रशिक्षण पद्धति में मानव संशोधन विकास में समस्यायें-कृषि सहकारी स्टाफ प्रशिक्षण संस्थान एवं कनिष्ठ स्तर के प्रशिक्षण संस्थान।
26. हरियाणा के सहकारी बैंकों हेतु प्रशिक्षण आवश्यकता का मूल्यांकन।
27. कैस्पनर वित्तीय एवं तकनीकी सेवायें-भारत में ग्रामीण माडल का एक एप्लीकेशन।
28. बंगलादेश में सूक्ष्म वित संस्थान।
29. बैकिंग एवं मानव संशोधन विकास के क्षेत्र में बदलता परिवेश स्टाक अनुपलब्ध।
30. सूक्ष्म वित प्रक्रिया शोध परियोजना- प्राप्त अनुभव एवं सबक।
31. उत्तर प्रदेश के किसानों में ऋण्सा लेने की क्षमता।
32. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में तकनीक के उपयोग के माध्यम से संगठन की प्रभाव शीलता।
बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान
नाबार्ड द्वारा प्रायोजिक स्वायत्त संस्था
इस वेबसाइट पर सामग्री का प्रकाशन एवं प्रबंधन बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा किया जाता है।
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